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Hindi Holy Bible Wordproject Bible
29 verses
1तब हम मुड़कर बाशान के मार्ग से चढ़ चले; और बाशान का ओग नाम राजा अपनी सारी सेना समेत हमारा साम्हना करने को निकल आया, कि एद्रेई में युद्ध करे।
2तब यहोवा ने मुझ से कहा, उस से मत डर; क्योंकि मैं उसको सारी सेना और देश समेत तेरे हाथ में किए देता हूँ; और जैसा तू ने हेशबोन के निवासी एमोरियों के राजा सीहोन से किया है वैसा ही उस से भी करना।
3सो इस प्रकार हमारे परमेश्वर यहोवा ने सारी सेना समेत बाशान के राजा ओग को भी हमारे हाथ में कर दिया; और हम उसको यहाँ तक मारते रहे कि उन में से कोई भी न बच पाया।
4उसी समय हम ने उनके सारे नगरों को ले लिया, कोई ऐसा नगर न रह गया जिसे हम ने उस से न ले लिया हो, इस रीति अर्गोब का सारा देश, जो बाशान में ओग के राज्य में था और उस में साठ नगर थे, वह हमारे वश में आ गया।
5ये सब नगर गढ़ वाले थे, और उनके ऊंची ऊंची शहरपनाह, और फाटक, और बेड़े थे, और इन को छोड़ बिना शहरपनाह के भी बहुत से नगर थे।
6और जैसा हम ने हेशबोन के राजा सीहोन के नगरों से किया था वैसा ही हम ने इन नगरों से भी किया, अर्थात सब बसे हुए नगरों को स्त्रियोंऔर बाल-बच्चों समेत सत्यानाश कर डाला।
7परन्तु सब घरेलू पशु और नगरों की लूट हम ने अपनी कर ली।
8यों हम ने उस समय यरदन के इस पार रहने वाले एमोरियों के दोनों राजाओं के हाथ से अर्नोन के नाले से ले कर हेर्मोन पर्वत तक का देश ले लिया।
9(हेर्मोन को सीदोनी लोग सिर्योन, और एमोरी लोग सनीर कहते हैं।)
10समथर देश के सब नगर, और सारा गिलाद, और सल्का, और एर्देई तक जो ओग के राज्य के नगर थे, सारा बाशान हमारे वश में आ गया।
11जो रपाई रह गए थे, उन में से केवल बाशान का राजा ओग रह गया था, उसकी चारपाई जो लोहे की है वह तो अम्मोनियों के रब्बा नगर में पड़ी है, साधारण पुरूष के हाथ के हिसाब से उसकी लम्बाई नौ हाथ की और चौड़ाई चार हाथ की है।
12जो देश हम ने उस समय अपने अधिकार में ले लिया वह यह है, अर्थात अर्नोन के नाले के किनारे वाले अरोएर नगर से ले सब नगरों समेत गिलाद के पहाड़ी देश का आधा भाग, जिसे मैं ने रूबेनियों और गादियों को दे दिया,
13और गिलाद का बचा हुआ भाग, और सारा बाशान, अर्थात अर्गोब का सारा देश जो ओग के राज्य में था, इन्हें मैं ने मनश्शे के आधे गोत्र को दे दिया। (स���रा बाशान तो रपाइयों का देश कहलाता है।
14और मनश्शेई याईर ने गशूरियोंऔर माकावासियोंके सिवानोंतक अर्गोब का सारा देश ले लिया, और बाशान के नगरोंका नाम अपने नाम पर हब्बोत्याईर रखा, और वही नाम आज तक बना है।)
15और मैं ने गिलाद देश माकीर को दे दिया,
16और रूबेनियों और गादियों को मैं ने गिलाद से ले अर्नोन के नाले तक का देश दे दिया, अर्थात उस नाले का बीच उनका सिवाना ठहराया, और यब्बोक नदी तक जो अम्मोनियों का सिवाना है;
17और किन्नेरेत से ले पिसगा की सलामी के नीचे के अराबा के ताल तक, जो खारा ताल भी कहलाता है, अराबा और यरदन की पूर्व की ओर का सारा देश भी मैं ने उन्हीं को दे दिया॥
18और उस समय मैं ने तुम्हें यह आज्ञा दी, कि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें यह देश दिया है कि उसे अपने अधिकार में रखो; तुम सब योद्धा हथियारबन्द हो कर अपने भाई इस्राएलियों के आगे आगे पार चलो।
19परन्तु तुम्हारी स्त्रियाँ, और बाल-बच्चे, और पशु, जिन्हें मैं जानता हूँ कि बहुत से हैं, वह सब तुम्हारे नगरों में जो मैं ने तुम्हें दिए हैं रह जाएँ।
20और जब यहोवा तुम्हारे भाइयों को वैसा विश्राम दे जैसा कि उसने तुम को दिया है, और वे उस देश के अधिकारी हो जाएँ जो तुम्हारा परमेश्वर यहोवा उन्हें यरदन पार देता है; तब तुम भी अपने अपने अधिकार की भूमि पर जो मैं ने तुम्हें दी है लौटोगे।
21फिर मैं ने उसी समय यहोशू से चिताकर कहा, तू ने अपनी आँखो से देखा है कि तेरे परमेश्वर यहोवा ने इन दोनों राजाओं से क्या क्या किया है; वैसा ही यहोवा उन सब राज्यों से करेगा जिन में तू पार हो कर जाएगा।
22उन से न डरना; क्योंकि जो तुम्हारी ओर से लड़ने वाला है वह तुम्हारा परमेश्वर यहोवा है॥
23उसी समय मैं ने यहोवा से गिड़गिड़ाकर बिनती की, कि हे प्रभु यहोवा,
24तू अपने दास को अपनी महिमा और बलवन्त हाथ दिखाने लगा है; स्वर्ग में और पृथ्वी पर ऐसा कौन देवता है जो तेरे से काम और पराक्रम के कर्म कर सके?
25इसलिये मुझे पार जाने दे कि यरदन पार के उस उत्तम देश को, अर्थात उस उत्तम पहाड़ और लबानोन को भी देखने पाऊँ।
26परन्तु यहोवा तुम्हारे कारण मुझ से रूष्ट हो गया, और मेरी न सुनी; किन्तु यहोवा ने मुझ से कहा, बस कर; इस विषय में फिर कभी मुझ से बातें न करना।
27पिसगा पहाड़ की चोटी पर चढ़ जा, और पूर्व, पच्छिम, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर दृष्टि करके उस देश को देख ले; क्योंकि तू इस यरदन के पार जाने न पाएगा।
28और यहोशू को आज्ञा दे, और उसे ढाढ़स देकर दृढ़ कर; क्योंकि इन लोगों के आगे आगे वही पार जाऐगा, और जो देश तू देखेगा उसको वही उनका निज भाग करा देगा।
29तब हम बेतपोर के साम्हने की तराई में ठहरे रहे॥