Loading Bible Translation
First-time download in progress. This may take a few seconds…
Hindi Holy Bible Wordproject Bible
22 verses
1मेरा प्राण जीवित रहने से उकताता है; मैं स्वतंत्रता पूर्वक कुड़कुड़ाऊंगा; और मैं अपने मन की कड़वाहट के मारे बातें करूंगा।
2मैं ईश्वर से कहूंगा, मुझे दोषी न ठहरा; मुझे बता दे, कि तू किस कारण मुझ से मुक़द्दमा लड़ता है?
3क्या तुझे अन्धेर करना, और दुष्टों की युक्ति को सफल कर के अपने हाथों के बनाए हुए को निकम्मा जानना भला लगता है?
4क्या तेरी देहधारियों की सी आंखें है? और क्या तेरा देखना मनुष्य का सा है?
5क्या तेरे दिन मनुष्य के दिन के समान हैं, वा तेरे वर्ष पुरुष के समयों के तुल्य हैं,
6कि तू मेरा अधर्म ढूंढ़ता, और मेरा पाप पूछता है?
7तुझे तो मालूम ही है, कि मैं दुष्ट नहीं हूँ, और तेरे हाथ से कोई छुड़ाने वाला नहीं!
8तू ने अपने हाथों से मुझे ठीक रचा है और जोड़कर बनाया है; तौभी मुझे नाश किए डालता है।
9स्मरण कर, कि तू ने मुझ को गून्धी हुई मिट्टी की नाईं बनाया, क्या तू मुझे फिर धूल में मिलाएगा?
10क्या तू ने मुझे दूध की नाईं उंडेलकर, और दही के समान जमाकर नहीं बनाया?
11फिर तू ने मुझ पर चमड़ा और मांस चढ़ाया और हड्डियां और नसें गूंथकर मुझे बनाया है।
12तू ने मुझे जीवन दिया, और मुझ पर करुणा की है; और तेरी चौकसी से मेरे प्राण की रक्षा हई है।
13तौभी तू ने ऐसी बातों को अपने मन में छिपा रखा; मैं तो जान गया, कि तू ने ऐसा ही करने को ठाना था।
14जो मैं पाप करूं, तो तू उसका लेखा लेगा; और अधर्म करने पर मुझे निर्दोष न ठहराएगा।
15जो मैं दुष्टता करूं तो मुझ पर हाय! और जो मैं धमीं बनूं तौभी मैं सिर न उठाऊंगा, क्योंकि मैं अपमान से भरा हुआ हूं और अपने दु:ख पर ध्यान रखता हूँ।
16और चाहे सिर उठाऊं तौभी तू सिंह की नाईं मेरा अहेर करता है, और फिर मेरे विरुद्ध आश्चर्यकर्म करता है।
17तू मेरे साम्हने अपने नये नये साक्षी ले आता है, और मुझ पर अपना क्रोध बढ़ाता है; और मुझ पर सेना पर सेना चढ़ाई करती है।
18तू ने मुझे गर्भ से क्यों निकाला? नहीं तो मैं वहीं प्राण छोड़ता, और कोई मुझे देखने भी न पाता।
19मेरा होन��� न होने के समान होता, और पेट ही से क़ब्र को पहुंचाया जाता।
20क्या मेरे दिन थोड़े नहीं? मुझे छोड़ दे, और मेरी ओर से मुंह फेर ले, कि मेरा मन थोड़ा शान्त हो जाए
21इस से पहिले कि मैं वहां जाऊं, जहां से फिर न लौटूंगा, अर्थात अन्धियारे और घोर अन्धकार के देश में, जहां अन्धकार ही अन्धकार है;
22और मृत्यु के अन्धकार का देश जिस में सब कुछ गड़बड़ है; और जहां प्रकाश भी ऐसा है जैसा अन्धकार।