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Hindi Holy Bible Wordproject Bible
16 verses
1मेरा प्राण नाश हुआ चाहता है, मेरे दिन पूरे हो चुके हैं; मेरे लिये कब्र तैयार है।
2निश्चय जो मेरे संग हैं वह ठट्ठा करने वाले हैं, और उनका झगड़ा रगड़ा मुझे लगातार दिखाई देता है।
3जमानत दे अपने और मेरे बीच में तू ही जामिन हो; कौन है जो मेरे हाथ पर हाथ मारे?
4तू ने इनका मन समझने से रोका है, इस कारण तू इन को प्रबल न करेगा।
5जो अपने मित्रों को चुगली खाकर लुटा देता, उसके लड़कों की आंखें रह जाएंगी।
6उसने ऐसा किया कि सब लोग मेरी उपमा देते हैं; और लोग मेरे मुंह पर थूकते हैं।
7खेद के मारे मेरी आंखों में घुंघलापन छा गया है, और मेरे सब अंग छाया की नाईं हो गए हैं।
8इसे देखकर सीधे लोग चकित होते हैं, और जो निर्दोष हैं, वह भक्तिहीन के विरुद्ध उभरते हैं।
9तौभी धमीं लोग अपना मार्ग पकड़े रहेंगे, और शुद्ध काम करने वाले सामर्थ्य पर सामर्थ्य पाते जाएंगे।
10तुम सब के सब मेरे पास आओ तो आओ, परन्तु मुझे तुम लोगों में एक भी बुद्धिमान न मिलेगा।
11मेरे दिन तो बीत चुके, और मेरी मनसाएं मिट गई, और जो मेरे मन में था, वह नाश हुआ है।
12वे रात को दिन ठहराते; वे कहते हैं, अन्धियारे के निकट उजियाला है।
13यदि मेरी आशा यह हो कि अधोलोक मेरा धाम होगा, यदि मैं ने अन्धियारे में अपना बिछौना बिछा लिया है,
14यदि मैं ने सड़ाहट से कहा कि तू मेरा पिता है, और कीड़े से, कि तू मेरी मां, और मेरी बहिन है,
15तो मेरी आशा कहां रही? और मेरी आशा किस के देखने में आएगी?
16वह तो अधोलोक में उतर जाएगी, और उस समेत मुझे भी मिट्टी में विश्राम मिलेगा।