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Hindi Holy Bible Wordproject Bible
19 verses
1हाय उस हत्यारी नगरी पर, वह तो छल और लूट के धन से भरी हुई है; लूट कम नहीं होती है।
2कोड़ों की फटकार और पहियों की घड़घड़ाहट हो रही है; घोड़े कूदते-फांदते और रथ उछलते चलते हैं।
3सवार चढ़ाई करते, तलवारें और भाले बिजली की नाईं चमकते हैं, मारे हुओं की बहुतायत और लोथों का बड़ा ढेर है; मुर्दों की कुछ गिनती नहीं, लोग मुर्दों से ठोकर खा खाकर चलते हैं!
4यह सब उस अति सुन्दर वेश्या, और निपुण टोनहिन के छिनाले की बहुतायत के कारण हुआ, जो छिनाले के द्वारा जाति-जाति के लोगों को, और टोने के द्वारा कुल-कुल के लोगों को बेच डालती है॥
5सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरे विरुद्ध हूं, और तेरे वस्त्र को उठा कर, तुझे जाति-जाति के साम्हने नंगी और राज्य-राज्य के साम्हने नीचा दिखाऊंगा।
6मैं तुझ पर घिनौनी वस्तुएं फेंक कर तुझे तुच्छ कर दूंगा, और सब से तेरी हंसी कराऊंगा।
7और जितने तुझे देखेंगे, सब तेरे पास से भाग कर कहेंगे, नीनवे नाश हो गई; कौन उसके कारण विलाप करे? हम उसके लिये शान्ति देने वाला कहां से ढूंढ़ कर ले आएं?
8क्या तू अमोन नगरी से बढ़ कर है, जो नहरों के बीच बसी थी, और उसके चारों ओर जल था, और महानद उसके लिये किला और शहरपनाह का काम देता था?
9कूश और मिस्री उसको अनगिनित बल देते थे, पूत और लूबी तेरे सहायक थे॥
10तौभी लोग उसको बंधुवाई में ले गए, और उसके नन्हें बच्चे सड़कों के सिरे पर पटक दिए गए; और उसके प्रतिष्ठित पुरूषों के लिये उन्होंने चिट्ठी डाली, और उसके सब रईस बेडिय़ों से जकड़े गए।
11तू भी मतवाली होगी, तू घबरा जाएगी; तू भी शत्रु के डर के मारे शरण का स्थान ढूंढेगी।
12तेरे सब गढ़ ऐसे अंजीर के वृक्षों के समान होंगे जिन में पहिले पक्के अंजीर लगे हों, यदि वे हिलाए जाएं तो फल खाने वाले के मुंह में गिरेंगे।
13देख, तेरे लोग जो तेरे बीच में हैं, वे स्त्रियां बन गए हैं। तेरे देश में प्रवेश करने के मार्ग तेरे शत्रुओं के लिये बिलकुल खुले पड़े हैं; और रूकावट की छड़ें आग के कौर हो गई हैं॥
14घिर जाने के दिनों के लिये पानी भर ले, और गढ़ों को अधिक दृढ़ कर; कीचड़ ले आकर गारा लताड़, और भट्ठे को सजा!
15वहां तू आग में भस्म होगी, और तलवार से तू नाश हो जाएगी। वह येलेक नाम टिड्डी की नाईं तुझे निगल जाएगी॥ यद्यपि तू अर्बे नाम टिड्डी के समान अनगिनित भी हो जाए!
16तेरे व्योपारी आकाश के तारागण से भी अधिक अनगिनित हुए। टिड्डी चट कर के उड़ जाती है।
17तेरे मुकुटधारी लोग टिड्डियों के समान, और सेनापति टिड्डियों के दलों सरीखे ठहरेंगे जो जाड़े के दिन में बाड़ों पर टिकते हैं, परन्तु जब सूर्य दिखाई देता है तब भाग जाते हैं; और कोई नहीं जानता कि वे कहां गए॥
18हे अश्शूर के राजा, तेरे ठहराए हुए चरवाहे ऊंघते हैं; तेरे शूरवीर भारी नींद में पड़ गए हैं। तेरी प्रजा पहाड़ों पर तितर-बितर हो गई है, और कोई उन को फिर इकट्ठे नहीं करता।
19तेरा घाव न भर सकेगा, तेरा रोग असाध्य है। जितने तेरा समाचार सुनेंगे, वे तेरे ऊपर ताली बजाएंगे। क्योंकि ऐसा कौन है जिस पर तेरी लगातार दुष्टता का प्रभाव न पड़ा हो?