Loading Bible Translation
First-time download in progress. This may take a few seconds…
Hindi Holy Bible Wordproject Bible
32 verses
1फिर यहोवा ने हारून से कहा, कि पवित्रस्थान के अधर्म का भार तुझ पर, और तेरे पुत्रों और तेरे पिता के घराने पर होगा; और तुम्हारा याजक कर्म के अधर्म का भार भी तेरे पुत्रों पर होगा।
2और लेवी का गोत्र, अर्थात तेरे मूलपुरूष के गोत्र वाले जो तेरे भाई हैं, उन को भी अपने साथ ले आया कर, और वे तुझ से मिल जाएं, और तेरी सेवा टहल किया करें, परन्तु साक्षीपत्र के तम्बू के साम्हने तू और तेरे पुत्र ही आया करें।
3जो तुझे सौंपा गया है उसकी और सारे तम्बू की भी वे रक्षा किया करें; परन्तु पवित्रस्थान के पात्रों के और वेदी के समीप न आएं, ऐसा न हो कि वे और तुम लोग भी मर जाओ।
4सो वे तुझ से मिल जाएं, और मिलापवाले तम्बू की सारी सेवकाई की वस्तुओं की रक्षा किया करें; परन्तु जो तेरे कुल का न हो वह तुम लोगों के समीप न आने पाए।
5और पवित्रस्थान और वेदी की रखवाली तुम ही किया करो, जिस से इस्त्राएलियों पर फिर कोप न भड़के।
6परन्तु मैं ने आप तुम्हारे लेवी भाइयों को इस्त्राएलियों के बीच से अलग कर लिया है, और वे मिलापवाले तम्बू की सेवा करने के लिये तुम को और यहोवा को सौंप दिये गए हैं।
7पर वेदी की और बीच वाले पर्दे के भीतर की बातों की सेवकाई के लिये तू और तेरे पुत्र अपने याजकपद की रक्षा करना, और तुम ही सेवा किया करना; क्योंकि मैं तुम्हें याजकपद की सेवकाई दान करता हूं; और जो तेरे कुल का न हो वह यदि समीप आए तो मार डाला जाए॥
8फिर यहोवा ने हारून से कहा, सुन, मैं आप तुझ को उठाई हुई भेंट सौंप देता हूं, अर्थात इस्त्राएलियों की पवित्र की हुई वस्तुएं; जितनी हों उन्हें मैं तेरा अभिषेक वाला भाग ठहराकर तुझे और तेरे पुत्रों को सदा का हक करके दे देता हूं।
9जो परमपवित्र वस्तुएं आग में होम न की जाएंगी वे तेरी ही ठहरें, अर्थात इस्त्राएलियों के सब चढ़ावों में से उनके सब अन्नबलि, सब पापबलि, और सब दोषबलि, जो वे मुझ को दें, वह तेरे और तेरे पुत्रों के लिये परमपवित्र ठहरें।
10उन को परमपवित्र वस्तु जानकर खाया करना; उन को हर एक पुरूष खा सकता है; वे तेरे लिये पवित्र हैं।
11फिर ये वस्तुएं भी तेरी ठहरें, अर्थात जितनी भेंट इस्त्राएली हिलाने के लिये दें, उन को मैं तुझे और तेरे बेटे-बेटियों को सदा का हक करके दे देता हूं; तेरे घराने में जितन�� शुद्ध हों वह उन्हें खा सकेंगे।
12फिर उत्तम से उत्तम नया दाखमधु, और गेहूं, अर्थात इनकी पहली उपज जो वे यहोवा को दें, वह मैं तुझ को देता हूं।
13उनके देश के सब प्रकार की पहली उपज, जो वे यहोवा के लिये ले आएं, वह तेरी ही ठहरे; तेरे घराने में जितने शुद्ध होंवे उन्हें खा सकेंगें।
14इस्त्राएलियों में जो कुछ अर्पण किया जाए वह भी तेरा ही ठहरे।
15सब प्राणियों में से जितने अपनी अपनी मां के पहिलौठे हों, जिन्हें लोग यहोवा के लिये चढ़ाएं, चाहे मनुष्य के चाहे पशु के पहिलौठे हों, वे सब तेरे ही ठहरें; परन्तु मनुष्यों और अशुद्ध पशुओं के पहिलौठों को दाम ले कर छोड़ देना।
16और जिन्हें छुड़ाना हो, जब वे महीने भर के हों तब उनके लिये अपने ठहराए हुए मोल के अनुसार, अर्थात पवित्रस्थान के बीस गेरा के शेकेल के हिसाब से पांच शेकेल लेके उन्हें छोड़ना।
17पर गाय, वा भेड़ी, वा बकरी के पहिलौठे को न छोड़ना; वे तो पवित्र हैं। उनके लोहू को वेदी पर छिड़क देना, और उनकी चरबी को हव्य करके जलाना, जिस से यहोवा के लिये सुखदायक सुगन्ध हो;
18परन्तु उनका मांस तेरा ठहरे, और हिलाई हुई छाती, और दाहिनी जांघ भी तेरा ही ठहरे।
19पवित्र वस्तुओं की जितनी भेंटें इस्त्राएली यहोवा को दें, उन सभों को मैं तुझे और तेरे बेटे-बेटियों को सदा का हक करके दे देता हूं: यह तो तेरे और तेरे वंश के लिये यहोवा की सदा के लिये नमक की अटल वाचा है।
20फिर यहोवा ने हारून से कहा, इस्त्राएलियों के देश में तेरा कोई भाग न होगा, और न उनके बीच तेरा कोई अंश होगा; उनके बीच तेरा भाग और तेरा अंश मैं ही हूं॥
21फिर मिलापवाले तम्बू की जो सेवा लेवी करते हैं उसके बदले मैं उन को इस्त्राएलियों का सब दशमांश उनका निज भाग कर देता हूं।
22और भविष्य में इस्त्राएली मिलापवाले तम्बू के समीप न आएं, ऐसा न हो कि उनके सिर पर पाप लगे, और वे मर जाएं।
23परन्तु लेवी मिलापवाले तम्बू की सेवा किया करें, और उनके अधर्म का भार वे ही उठाया करें; यह तुम्हारी पीढ़ीयों में सदा की विधि ठहरे; और इस्त्राएलियों के बीच उनका कोई निज भाग न होगा।
24क्योंकि इस्त्राएली जो दशमांश यहोवा को उठाई हुई भेंट करके देंगे, उसे मैं लेवियों को निज भाग करके देता हूं, इसीलिये मैं ने उनके विषय में कहा है, कि इस्त्राएलियों के बीच कोई भाग उन को न मिले।
25फिर यहोवा ने मूसा से कहा,
26तू लेवियों से कह, कि जब जब तुम इस्त्राएलियों के हाथ से वह दशमांश लो जिसे यहोवा तुम को तुम्हारा निज भाग करके उन से दिलाता है, तब तब उस में से यहोवा के लिये एक उठाई हुई भेंट करके दशमांश का दशमांश देना।
27और तुम्हारी उठाई हुई भेंट तुम्हारे हित के लिये ऐसी गिनी जाएगी जैसा खलिहान में का अन्न, वा रसकुण्ड में का दाखरस गिना जाता है।
28इस रीति तुम भी अपने सब दशमांशों में से, जो इस्त्राएलियों की ओर से पाओगे, यहोवा को एक उठाई हुई भेंट देना; और यहोवा की यह उठाई हुई भेंट हारून याजक को दिया करना।
29जितने दान तुम पाओ उन में से हर एक का उत्तम से उत्तम भाग, जो पवित्र ठहरा है, सो उसे यहोवा के लिये उठाई हुई भेंट करके पूरी पूरी देना।
30इसलिये तू लेवियों से कह, कि जब तुम उस में का उत्तम से उत्तम भाग उठा कर दो, तब यह तुम्हारे लिये खलिहान में के अन्न, और रसकुण्ड के रस के तुल्य गिना जाएगा;
31और उसको तुम अपने घरानों समेत सब स्थानों में खा सकते हो, क्योंकि मिलापवाले तम्बू की जो सेवा तुम करोगे उसका बदला यही ठहरा है।
32और जब तुम उसका उत्तम से उत्तम भाग उठा कर दो तब उसके कारण तुम को पाप न लगेगा। परन्तु इस्त्राएलियों की पवित्र की हुई वस्तुओं को अपवित्र न करना, ऐसा न हो कि तुम मर जाओ॥