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Hindi Holy Bible Wordproject Bible
15 verses
1हे निर्लज्ज जाति के लोगो, इकट्ठे हो!
2इस से पहिले कि दण्ड की आज्ञा पूरी हो और बचाव का दिन भूसी की नाईं निकले, और यहोवा का भड़कता हुआ क्रोध तुम पर आ पड़े, और यहोवा के क्रोध का दिन तुम पर आए, तुम इकट्ठे हो।
3हे पृथ्वी के सब नम्र लोगों, हे यहोवा के नियम के मानने वालों, उसको ढूंढ़ते रहो; धर्म से ढूंढ़ों, नम्रता से ढूंढ़ो; सम्भव है तुम यहोवा के क्रोध के दिन में शरण पाओ।
4क्योंकि अज्जा तो निर्जन और अश्कलोन उजाड़ हो जाएगा; अशदोद के निवासी दिनदुपहरी निकाल दिए जाएंगे, और एक्रोन उखाड़ा जाएगा॥
5समुद्रतीर के रहने वालों पर हाय; करेती जाति पर हाय; हे कनान, हे पलिश्तियों के देश, यहोवा का वचन तेरे विरुद्ध है; और मैं तुझ को ऐसा नाश करूंगा कि तुझ में कोई न बचेगा।
6और उसी समुद्रतीर पर चरवाहों के घर होंगे और भेड़शालाओं समेत चराई ही चराई होगी।
7अर्थात वही समुद्रतीर यहूदा के घराने के बचे हुओं को मिलेगी, वे उस पर चराएंगे; वे अश्कलोन के छोड़े हुए घरों में सांझ को लेटेंगे, क्योंकि उनका परमेश्वर यहोवा उनकी सुधि ले कर उनके बंधुओं को लौटा ले जाएगा॥
8मोआब ने जो मेरी प्रजा की नामधराई और अम्मोनियों ने जो उसकी निन्दा कर के उसके देश की सीमा पर चढ़ाई की, वह मेरे कानों तक पहुंची है।
9इस कारण इस्राएल के परमेश्वर, सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की शपथ, निश्चय मोआब सदोम के समान, और अम्मोनी अमोरा की नाईं बिच्छू पेड़ों के स्थान और नमक की खानियां हो जाएंगे, और सदैव उजड़े रहेंगे। मेरी प्रजा के बचे हुए उन को लूटेंगे, और मेरी जाति के शेष लोग उन को अपने भाग में पाएंगे।
10यह उनके गर्व का पलटा होगा, क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की प्रजा की नामधराई की, और उस पर बड़ाई मारी है।
11यहोवा उन को डरावना दिखाई देगा, वह पृथ्वी भर के देवताओं को भूखों मार डालेगा, और अन्यजातियों के सब द्वीपों के निवासी अपने अपने स्थान से उसको दण्डवत करेंगे॥
12हे कूशियों, तुम भी मेरी तलवार से मारे जाओगे।
13वह अपना हाथ उत्तर दिशा की ओर बढ़ा कर अश्शूर को नाश करेगा, और नीनवे को उजाड़ कर जंगल के समान निर्जल कर देगा।
14उसके बीच में सब जाति के वनपशु झुंड के झुंड बैठेंगे; उसके खम्भों की कंगनियों पर धनेश और साही दोनों रात को बसेरा करेंगे और उसकी खिड़कियों में बोला करेंगे; उसकी डेवढिय़ां सूनी पड़ी रहेंगी, और देवदार की लकड़ी उघारी जाएगी।
15यह वही नगरी है, जो मगन रहती और निडर बैठी रहती थी, और सोचती थी कि मैं ही हूं, और मुझे छोड़ कोई है ही नहीं। परन्तु अब यह उजाड़ और वन पशुओं के बैठने का स्थान बन गया है, यहां तक कि जो कोई इसके पास हो कर चले, वह ताली बजाएगा और हाथ हिलाएगा।